1. प्रकाश क्या है?
प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है, जिसकी सहायता से हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं।
प्रकाश सामान्यतः सीधी रेखा में चलता है। इसे प्रकाश का सरल रेखीय संचरण कहते हैं।
2. प्रकाश का परावर्तन क्या है?
जब प्रकाश की किरण किसी चमकीली या परावर्तक सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
उदाहरण:
आईने पर प्रकाश डालने पर प्रकाश वापस हमारी ओर आता है।
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मुख्य शब्द
- आपतित किरण: सतह पर गिरने वाली प्रकाश किरण।
- परावर्तित किरण: सतह से टकराकर वापस जाने वाली किरण।
- अभिलंब (Normal): आपतन बिंदु पर सतह के लंबवत खींची गई काल्पनिक रेखा।
- आपतन बिंदु: वह बिंदु जहाँ प्रकाश सतह पर गिरता है।
- आपतन कोण (i): आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण।
- परावर्तन कोण (r): परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच का कोण।
3. परावर्तन के नियम
प्रकाश के परावर्तन के दो मुख्य नियम हैं।
नियम 1
आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
नियम 2
आपतन कोण = परावर्तन कोण
अर्थात:
∠i = ∠r
उदाहरण:
अगर आपतन कोण 30° है, तो परावर्तन कोण भी 30° होगा।
4. परावर्तन के प्रकार
प्रकाश का परावर्तन मुख्यतः दो प्रकार का होता है:
① नियमित परावर्तन
जब प्रकाश किसी चिकनी और चमकीली सतह से टकराता है और परावर्तित किरणें एक व्यवस्थित दिशा में जाती हैं।
उदाहरण:
- समतल दर्पण
- चमकीली धातु
- शांत पानी
② विसरित/अनियमित परावर्तन
जब प्रकाश किसी खुरदरी सतह से टकराता है और अलग-अलग दिशाओं में फैल जाता है।
उदाहरण:
- दीवार
- कागज
- लकड़ी
ध्यान रखें: विसरित परावर्तन में भी परावर्तन के नियम लागू होते हैं।
5. समतल दर्पण
जिस दर्पण की परावर्तक सतह समतल होती है, उसे समतल दर्पण (Plane Mirror) कहते हैं।
समतल दर्पण में प्रतिबिंब के गुण
समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिंब:
- आभासी होता है।
- सीधा होता है।
- वस्तु के समान आकार का होता है।
- दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है।
- इसमें पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion) होता है।
6. पार्श्व परिवर्तन
समतल दर्पण में दायाँ भाग बायाँ और बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है।
उदाहरण के लिए, एम्बुलेंस के आगे कई बार AMBULANCE को उल्टा लिखा जाता है, ताकि ड्राइवर उसे पीछे के दर्पण में सीधा पढ़ सके।
7. वास्तविक और आभासी प्रतिबिंब
वास्तविक प्रतिबिंब
जब प्रकाश की किरणें वास्तव में एक स्थान पर मिलती हैं, तो वास्तविक प्रतिबिंब बनता है।
इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।
आभासी प्रतिबिंब
जब प्रकाश की किरणें वास्तव में नहीं मिलतीं, लेकिन उनकी पीछे की ओर बढ़ाई गई रेखाएँ मिलने जैसी प्रतीत होती हैं, तो आभासी प्रतिबिंब बनता है।
इसे सामान्यतः पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
समतल दर्पण → आभासी प्रतिबिंब।
8. गोलीय दर्पण (Spherical Mirror)
जिस दर्पण की परावर्तक सतह किसी खोखले गोले के एक भाग जैसी होती है, उसे गोलीय दर्पण कहते हैं।
गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं:
① अवतल दर्पण (Concave Mirror)
इसकी परावर्तक सतह अंदर की ओर मुड़ी होती है।
② उत्तल दर्पण (Convex Mirror)
इसकी परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी होती है।
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9. गोलीय दर्पण के महत्वपूर्ण बिंदु
ध्रुव (P)
दर्पण की परावर्तक सतह का मध्य बिंदु ध्रुव P कहलाता है।
वक्रता केंद्र (C)
जिस गोले का दर्पण एक भाग है, उसके केंद्र को वक्रता केंद्र C कहते हैं।
वक्रता त्रिज्या (R)
ध्रुव P और वक्रता केंद्र C के बीच की दूरी को वक्रता त्रिज्या कहते हैं।
R = PC
मुख्य अक्ष
ध्रुव और वक्रता केंद्र से गुजरने वाली सीधी रेखा को मुख्य अक्ष कहते हैं।
मुख्य फोकस (F)
मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं, वह मुख्य फोकस F कहलाता है।
फोकस दूरी (f)
ध्रुव P और फोकस F के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते हैं।
10. महत्वपूर्ण सूत्र
गोलीय दर्पण के लिए:
R = 2f
अर्थात:
f = R/2
उदाहरण:
अगर R = 20 cm है,
तो:
f = 20/2 = 10 cm
11. अवतल दर्पण में प्रतिबिंब
अवतल दर्पण में वस्तु को अलग-अलग स्थानों पर रखने पर अलग-अलग प्रकार के प्रतिबिंब बनते हैं।
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर | बहुत छोटा | वास्तविक, उल्टा |
| C से बाहर | F और C के बीच | छोटा | वास्तविक, उल्टा |
| C पर | C पर | समान | वास्तविक, उल्टा |
| C और F के बीच | C से बाहर | बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| F पर | अनंत पर | बहुत बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| F और P के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |
12. उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब
उत्तल दर्पण में वस्तु कहीं भी रखी जाए, प्रतिबिंब सामान्यतः:
- आभासी
- सीधा
- छोटा
बनता है।
इसी कारण उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों के पीछे देखने वाले दर्पण (rear-view mirror) में किया जाता है।
13. दर्पण का सूत्र
गोलीय दर्पण के लिए:
1/f = 1/v + 1/u
जहाँ:
- f = फोकस दूरी
- v = प्रतिबिंब दूरी
- u = वस्तु दूरी
14. आवर्धन (Magnification)
दर्पण के लिए:
m = hᵢ/hₒ = -v/u
जहाँ:
- hᵢ = प्रतिबिंब की ऊँचाई
- hₒ = वस्तु की ऊँचाई
- v = प्रतिबिंब दूरी
- u = वस्तु दूरी
m का अर्थ
अगर:
m > 1 → प्रतिबिंब बड़ा
m < 1 → प्रतिबिंब छोटा
m = 1 → समान आकार
15. अवतल दर्पण के उपयोग
अवतल दर्पण का उपयोग:
- शेविंग/मेकअप दर्पण में
- दंत चिकित्सक द्वारा
- टॉर्च में
- वाहन की हेडलाइट में
- सर्चलाइट में
- सौर भट्ठी में
किया जाता है।
16. उत्तल दर्पण के उपयोग
उत्तल दर्पण का उपयोग:
- कार/बस के rear-view mirror में
- दुकानों और सुरक्षा स्थानों पर बड़े क्षेत्र को देखने के लिए
किया जाता है।
क्यों?
क्योंकि उत्तल दर्पण व्यापक क्षेत्र (wide field of view) दिखाता है और छोटा, सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
⭐ परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें
याद कर लो:
परावर्तन का दूसरा नियम:
➡️ आपतन कोण = परावर्तन कोण
गोलीय दर्पण:
➡️ R = 2f
दर्पण सूत्र:
➡️ 1/f = 1/v + 1/u
आवर्धन:
➡️ m = -v/u
समतल दर्पण:
➡️ आभासी + सीधा + समान आकार
उत्तल दर्पण:
➡️ आभासी + सीधा + छोटा
अवतल दर्पण:
➡️ वस्तु की स्थिति के अनुसार प्रतिबिंब का आकार और प्रकृति बदलती है।
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